परांठा लगभग रोटी की तरह ही बनाया जाता है, फर्क सिर्फ इसकी सिंकाई का है। रोटी को जहां तवे पर सेंकने के बाद सीधे आंच पर भी फुलाया जाता है वहीं परांठा सिर्फ तवे पर ही सेंका जाता है। रोटी को बनाने के बाद ऊपर से शुद्ध घी लगाया जा सकता है, वहीं परांठे को तवे पर सेंकते समय ही घी या तेल लगा कर सेंका जाता है।[१] भरवां परांठा बनाने के लिए आटा या मैदा मल कर उसकी लोई बेल कर उसमें भरावन भरें, फिर उसे बेल कर तवे पर सेंकें। [२] परांठा शब्द बना है उपरि+आवर्त से। उपरि यानी ऊपर का और आवर्त यानी चारों और घुमाना। सिर्फ तवे पर बनाई जाने वाली रोटी या परांठे को सेंकने की विधि पर गौर करें। इसे समताप मिलता रहे इसके लिए इसे ऊपर से लगातार घुमा-फिरा कर सेंका जाता है। फुलके की तरह परांठे की दोनो पर्तें नहीं फूलतीं बल्कि सिर्फ ऊपरी परत ही फूलती है। इसका क्रम कुछ यूं रहा उपरि+आवर्त > उपरावटा > परांवठा > परांठा। वैसे सीधे शब्दों में पर्त वाला आटा का व्यंजन = पर्त+आटा= पराटा=परांठा। [३] भारत पर्यन्त और विदेशों में भी ये बहुत प्रचलित हैं। दक्षिण भारत में केरल का परांठा प्रसिद्ध है। इसको वहां प्रोट्टा कहते हैं। इसमें अत्यधिक चिकनाई के साथ ढेरों पर्तें होती हैं। परांठे को भारतीय लोग मलेशिया और मॉरीशस तक ले गये, जहां आज इसे फराटा और सिंगापुर में रोटी कनाई या रोटी प्राटा कहते हैं। म्यांमार में इसे पलाता कहते हैं। ट्रिनिडाड एवं टोबैगो में ये अत्यधिक पतले और बहुत बड़े होते हैं, और बस्सप-शट कहलाते हैं।
हिन्दुस्तानी रसोई में बहुत तरह के परांठे बनते हैं। [४] सबसे आसान तो सादा परांठा ही होता है। सादे परांठे के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे गोल परांठा, तिकोना परांठा, चौजोर परांठा। दुपर्ती परांठा य बहुपर्ती परांठा। सादे के बाद भरवां परांठे आते हैं। [५] इनमें सर्वाधिक लोकप्रिय है आलू का परांठा। बहुत सी गृहिणियां साल भर मौसमी सब्जियों और अन्य पदार्थो की सब्जियों से भरवां परांठें बनाती हैं। रसोइयों की प्रयोगधर्मिता से परांठों की विविधता लगातार बढ़ती ही रही है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

hi, there !!
ReplyDeletePARANTHA is very nice & a lovely food, specialy when it was cooked by "MAA".
Wanna take a PARANTHA with nice CHHOLE is a nice IDEA.
Hi...well as usual, you have taken 'out of the box' initiative, in this case 'lunch box'. :)
ReplyDeleteI am pleased...as for suggestions, I will give but in return ,i will want a box of parantha choley for myself :)
I would say you are doing a social service by providing livelihood with self respect to these women..However it is essential that you look at specifics like customer identification, pricing, quality and packaging, and logistics like transport.
do this also and start on a small scale to be revised upwards according to response..
All the best!